खगोल शब्दावली
खगोल शब्दावली
निर्देशांक, चंद्रमा, ग्रहों और ग्रहणों से जुड़े 119 शब्दों के अर्थ जानें। वर्णक्रम से शब्द चुनें और संबंधित मार्गदर्शिका में विषय विस्तार से पढ़ें।
अ
- अक्षीय दोलन — न्यूटेशन
- पृथ्वी के धीमे अयनचलन पर चढ़े छोटे आवर्ती अभिविन्यास-बदलाव। मुख्य चंद्र-संबंधी पद की अवधि लगभग 18.6 वर्ष और क्रांतिवृत्तीय देशांतर में आयाम लगभग 17 कोणीय सेकंड है; झुकाव में भी परिवर्तन होता है। मुख्य दीर्घकालिक अयनचलन और ये छोटे आवर्ती पद अलग योगदान हैं।संबंधित मार्गदर्शिका: J2000 और JNow — अयनचलन व अक्षीय दोलन
- अधोबिंदु
- पर्यवेक्षक के ठीक नीचे की दिशा, शिरोबिंदु के विपरीत और क्षितिज से 90° नीचे। पृथ्वी सतह से वहाँ के आकाशीय पिंड सीधे दिखाई नहीं देते। फिर भी क्षैतिज ज्यामिति और याम्योत्तर के पूरे वृत्त को समझाने में यह उपयोगी संदर्भ है।
- अपभू
- पृथ्वी के चारों ओर कक्षा का सबसे दूर बिंदु। चंद्रमा के अपभू की दूरी हर बार समान नहीं, प्रायः लगभग 4.05 लाख किलोमीटर के आसपास होती है। उसके पास का पूर्णचंद्र छोटा दिखाई देता है और लोकप्रिय रूप से मिनीमून कहलाता है।संबंधित मार्गदर्शिका: सुपरमून और मिनीमून — दूरी से कितना अंतर आता है?
- अपवर्तन
- वायुमंडल की बदलती परतों में प्रकाश मुड़ने से आकाशीय पिंड का ज्यामितीय दिशा से ऊँचा दिखाई देना। मानक क्षितिज पर लगभग 34 कोणीय मिनट, सूर्य के व्यास से थोड़ा अधिक, हो सकता है। वास्तविक तापमान और दबाव इसे बदलते हैं। सूर्य का ऊपरी किनारा केंद्र के ज्यामितीय क्षितिज पार करने से पहले दिख सकता है।संबंधित मार्गदर्शिका: अपवर्तन और क्षितिज-अवनमन — उदय-अस्त पर प्रभाव
- अपसौर
- सूर्य की परिक्रमा में उससे सबसे दूर का बिंदु। पृथ्वी जुलाई के आरंभ में लगभग 15.2 करोड़ किलोमीटर पर अपसौर पहुँचती है, जबकि उत्तरी गोलार्ध में गर्मी है। ऋतुओं का प्रमुख कारण पृथ्वी के अक्ष का झुकाव है, सूर्य से दूरी नहीं।
- अयनचलन
- पृथ्वी के झुके भूमध्य उभार पर सूर्य और चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण से अक्ष की धीमी लट्टू जैसी गति। प्रतिनिधि चक्र लगभग 25,800 वर्ष है। वसंत बिंदु क्रांतिवृत्त पर करीब 50 कोणीय सेकंड प्रति वर्ष खिसकता है। यह दर हर तारे के विषुवांश या क्रांति में समान बदलाव नहीं है।संबंधित मार्गदर्शिका: J2000 और JNow — अयनचलन व अक्षीय दोलन
- अयनांत
- सूर्य की अधिकतम उत्तरी या दक्षिणी क्रांति, लगभग ±23.4°, का खगोलीय क्षण। जून में लगभग 21 और दिसंबर में लगभग 21 तारीख के आसपास होता है। उत्तरी भारत में जून के आसपास सबसे लंबा और दिसंबर के आसपास सबसे छोटा दिन; दक्षिणी गोलार्ध में ऋतु-संबंध उलटा है। यह पूरा दिन या धार्मिक कैलेंडर की गणना नहीं।संबंधित मार्गदर्शिका: अयनांत और विषुव — सूर्य से तय ऋतु-बिंदु
आ
- आकाशीय विषुवत
- पृथ्वी के विषुवत तल का आकाशीय गोले पर महान वृत्त, दोनों ध्रुवों से 90° दूर। क्रांति इसी से मापते हैं। आदर्श क्षितिज को पूर्व और पश्चिम में काटता है; उसकी अधिकतम ऊँचाई सामान्यतः 90° घटा निरपेक्ष भौगोलिक अक्षांश है। ध्रुवों पर क्षितिज से संबंध विशेष है।संबंधित मार्गदर्शिका: विषुवांश और क्रांति — आकाश के देशांतर व अक्षांश
इ
- इफेमेरिस
- क्रमिक क्षणों के लिए किसी आकाशीय पिंड की स्थिति और अन्य मान देने वाली तालिका या गणना। नाम का यूनानी मूल ‘दैनिक’ से जुड़ा है। आधुनिक इफेमेरिस ग्रहों, चंद्रमा, निर्देशांकों और घटनाओं की योजना में काम आती है; यही शब्द Apphemeride के नाम में भी है।
उ
- उपछाया
- छाया का वह क्षेत्र जहाँ प्रकाश-स्रोत का केवल कुछ भाग ढका है। चंद्रग्रहण में पृथ्वी की उपछाया चंद्रमा को शुरू में थोड़ा मंद करती है। पृथ्वी पर चंद्रमा की उपछाया वाले स्थान से आंशिक सूर्यग्रहण दिखता है; यह नंगी आँख से सूर्य देखने की सुरक्षित स्थिति नहीं।संबंधित मार्गदर्शिका: चंद्रग्रहण — छाया, लाल रंग और दृश्यता
- उपभू
- पृथ्वी के चारों ओर कक्षा का सबसे निकट बिंदु। चंद्रमा के अलग उपभू लगभग 3.56–3.70 लाख किलोमीटर के बीच हो सकते हैं। उपभू के पास पूर्णचंद्र को लोकप्रिय रूप से सुपरमून कहते हैं। सभी उपभू समान दूरी पर नहीं और सूर्य से निकटता का उपसौर अलग शब्द है।संबंधित मार्गदर्शिका: सुपरमून और मिनीमून — दूरी से कितना अंतर आता है?
- उपसौर
- सूर्य की परिक्रमा में उससे सबसे निकट बिंदु। पृथ्वी जनवरी के आरंभ में करीब 14.7 करोड़ किलोमीटर और बुध अपने उपसौर में लगभग 4.6 करोड़ किलोमीटर पर हो सकता है। पृथ्वी का निकटतम सूर्य जनवरी में होने से उत्तरी सर्दी नहीं बदलती; ऋतु का प्रमुख कारण अक्षीय झुकाव है।
- उल्का
- छोटा धूल या शैल-कण लगभग 11–72 किलोमीटर प्रति सेकंड की गति से वायुमंडल में आकर रोशनी पैदा करे तो वह दृश्य उल्का है। सामान्य चमक लगभग 80–120 किलोमीटर ऊँचाई पर होती है। बहुत चमकीली उल्काएँ अग्निगोल कहलाती हैं। जमीन पर बचा टुकड़ा उल्कापिंड है, आकाश की चमक से अलग।संबंधित मार्गदर्शिका: उल्का वर्षा — विकिरण बिंदु, ZHR और वास्तविक दर
- उल्का धारा
- पृथ्वी के धूमकेतु या क्षुद्रग्रह के धूल-पथ से गुजरने पर एक ऋतु में बढ़ती उल्का गतिविधि। उल्काएँ एक विकिरण बिंदु से निकलती लगती हैं और सामान्यतः उसी तारामंडल से नाम पाती हैं। हर वर्ष का अधिकतम और वास्तविक दर बदल सकते हैं; प्रकाशित आदर्श दर स्थानीय गिनती नहीं।संबंधित मार्गदर्शिका: उल्का वर्षा — विकिरण बिंदु, ZHR और वास्तविक दर
ऊ
- ऊँचाई
- स्थानीय गणितीय क्षितिज से पिंड की दिशा का ऊर्ध्व कोण। क्षितिज पर 0°, सिर के ठीक ऊपर 90° और क्षितिज के नीचे ऋणात्मक मान है। दिगंश के साथ क्षैतिज निर्देशांक बनता है। ज्यामितीय और अपवर्तन-सहित दृश्य ऊँचाई अलग हो सकती हैं; तुलना करते समय संदर्भ देखें।संबंधित मार्गदर्शिका: सूर्य की स्थिति — दिगंश, ऊँचाई और छाया
ए
- एनालेमा
- एक स्थान से वर्षभर समान माध्य सौर समय पर सूर्य की दिशाएँ दर्ज करने पर बनने वाली लगभग आठ जैसी आकृति। उत्तर-दक्षिण फैलाव सौर क्रांति और पूर्व-पश्चिम हटाव समय समीकरण से जुड़ा है। चित्र में उसका झुकाव और ऊर्ध्वाधर आकार स्थानीय दिशा तथा समय पर भी निर्भर है।संबंधित मार्गदर्शिका: एनालेमा — सूर्य आकाश में आठ की आकृति क्यों बनाता है?
- एल्बीडो
- किसी पिंड की सूर्यप्रकाश लौटाने की क्षमता का माप। ज्यामितीय और कुल ऊर्जा-आधारित एल्बीडो की परिभाषाएँ अलग हैं। चंद्रमा का ज्यामितीय एल्बीडो लगभग 0.12 है; शुक्र के बादल अधिक प्रकाश लौटाते हैं। आकार, दूरी और प्रकाशन-ज्यामिति के साथ यह दिखने वाली चमक निर्धारित करता है।संबंधित मार्गदर्शिका: तारकीय परिमाण — छोटा अंक अधिक चमकीला क्यों है?
क
- कला कोण
- पिंड पर स्थित काल्पनिक पर्यवेक्षक के लिए सूर्य और पृथ्वी की दिशाओं के बीच कोण। 0° पर लगभग पूरा प्रकाशित चक्र, 90° पर आधा और 180° पर रात्रि ओर दिखती है। बाहरी ग्रहों में सीमा छोटी होती है; मंगल लगभग 47° तक पहुँच सकता है। यह पृथ्वी से दिखने वाला सूर्य-पिंड दीर्घांतरण नहीं।
- काल-तिथि
- वह संदर्भ क्षण जिसके लिए पिंड की स्थिति या कक्षीय तत्व लागू हैं। तारों की स्वगति में यह खास जरूरी है। इसे निर्देशांक जाल के विषुव-संदर्भ और पूरे संदर्भ तंत्र से अलग रखें। J2000.0 एक मानक क्षण है, लेकिन हर सूची का वास्तविक अवलोकन उसी दिन हुआ हो, यह अर्थ नहीं।संबंधित मार्गदर्शिका: J2000 और JNow — अयनचलन व अक्षीय दोलन
- कुलमिनेशन
- पिंड का स्थानीय याम्योत्तर पार करना। ऊपरी पार पर अधिकतम और निचले पार पर न्यूनतम दैनिक ऊँचाई मिलती है। ऊपरी पार हमेशा दक्षिण में नहीं, अक्षांश और क्रांति के अनुसार उत्तर में भी हो सकता है। सूर्य का ऊपरी कुलमिनेशन वास्तविक स्थानीय सौर दोपहर है।संबंधित मार्गदर्शिका: समय समीकरण — सौर दोपहर हमेशा 12 बजे क्यों नहीं?
- केंद्रीय रेखा
- केंद्रीय सूर्यग्रहण में चंद्र छाया-अक्ष का पृथ्वी की सतह पर खींचा पथ। उसके पास सूर्य और चंद्रमा का संरेखण सर्वाधिक केंद्रीय होता है और समान स्थानीय पथ-खंड में पूर्णता या वलय अवस्था सामान्यतः सबसे लंबी होती है। दोनों ओर पथ-सीमाएँ हैं; पूरे विश्व का सर्वाधिक अवधि-बिंदु अलग स्थान पर हो सकता है।संबंधित मार्गदर्शिका: सूर्यग्रहण — पूर्ण, वलयाकार और आंशिक कैसे बनते हैं?
- कोणीय आकार
- आकाश में पिंड का दिखाई देने वाला व्यास या विस्तार, डिग्री, कोणीय मिनट या सेकंड में। सूर्य और चंद्रमा करीब आधा डिग्री, बृहस्पति दूरी के अनुसार लगभग 30–50 कोणीय सेकंड हो सकता है। वास्तविक आकार और दूरी मिलकर इसे तय करते हैं; बड़ा दिखना हमेशा बड़ा वास्तविक पिंड होना नहीं।संबंधित मार्गदर्शिका: सुपरमून और मिनीमून — दूरी से कितना अंतर आता है?
- कोलॉन्गिट्यूड
- चंद्रमा की सुबह की प्रकाश-छाया सीमा के लिए प्रयुक्त सौर-संबंधी देशांतर। प्रचलित गिनती में प्रथम चतुर्थी पर करीब 0°, पूर्णचंद्र पर 90°, अंतिम चतुर्थी पर 180° और अमावस्या पर 270° है। इससे क्रेटर पर तिरछी रोशनी के अवसर चुन सकते हैं; यह पृथ्वी का भौगोलिक देशांतर नहीं।
- क्रांति
- आकाशीय विषुवत के उत्तर या दक्षिण दिशा का कोण, δ से लिखते हैं। उत्तर में धनात्मक, दक्षिण में ऋणात्मक; सीमा +90° से −90°। भौगोलिक अक्षांश के साथ यह ऊपरी कुलमिनेशन की ऊँचाई और तारे के उगने-अस्त होने की संभावना तय करता है।संबंधित मार्गदर्शिका: विषुवांश और क्रांति — आकाश के देशांतर व अक्षांश
- क्रांतिवृत्त
- तारों के सामने सूर्य का प्रत्यक्ष वार्षिक महान-वृत्तीय मार्ग, अर्थात पृथ्वी के सौर कक्षीय तल का आकाशीय प्रक्षेपण। यह विषुवत से लगभग 23.4° झुका है। चंद्रमा और ग्रह सामान्यतः इसके आसपास चलते हैं, जबकि उनका वास्तविक अक्षांश उनकी कक्षीय ज्यामिति से बदलता है।संबंधित मार्गदर्शिका: खगोलीय निर्देशांक — क्षितिज, विषुवत और क्रांतिवृत्त
- क्वाड्रेचर
- सूर्य और पिंड के क्रांतिवृत्तीय देशांतर में 90° पूर्वी या पश्चिमी अंतर। बाहरी ग्रह पूर्वी अवस्था में लगभग सूर्यास्त और पश्चिमी में लगभग सूर्योदय के पास ऊपरी कुलमिनेशन में होते हैं। चंद्र चतुर्थियाँ इसके निकट हैं। वास्तविक गोलकीय कोण अक्षांश से थोड़ा अलग हो सकता है; बुध-शुक्र सूर्य से 90° तक नहीं पहुँचते।संबंधित मार्गदर्शिका: युति, वियुति और क्वाड्रेचर — ग्रहों की स्थितियाँ
- क्षितिज
- आकाश और पृथ्वी के बीच दिखाई देने वाली सीमा। गणितीय क्षितिज पर्यवेक्षक की लंब दिशा के लंबवत तल है, शिरोबिंदु से 90° दूर। वास्तविक दृश्य सीमा भूभाग, भवन, ऊँचाई और अवनमन से अलग हो सकती है। पिंड की ऊँचाई और उदय-अस्त की परिभाषा में कौन सा क्षितिज है, यह महत्वपूर्ण है।संबंधित मार्गदर्शिका: सूर्य की स्थिति — दिगंश, ऊँचाई और छाया
- क्षितिज-अवनमन
- ऊँचे स्थान से खुले दूरस्थ क्षितिज का स्थानीय गणितीय क्षितिज से नीचे दिखाई देने वाला कोण। अधिक ऊँचाई में यह बढ़ता है और आदर्श खुले दृश्य में सूर्योदय पहले, सूर्यास्त बाद में कर सकता है। सामने के पहाड़ या भवन विपरीत प्रभाव दे सकते हैं; समुद्रतल से ऊँचाई अकेली वास्तविक दृश्य सीमा नहीं बताती।संबंधित मार्गदर्शिका: अपवर्तन और क्षितिज-अवनमन — उदय-अस्त पर प्रभाव
- क्षैतिज प्रणाली
- स्थानीय क्षितिज को आधार बनाकर दिगंश और ऊँचाई से दिशा बताने वाला जाल। सीधे बताता है कि अभी कहाँ देखें। पृथ्वी के घूर्णन से मान बदलते हैं और दूसरे स्थान से उसी क्षण अलग होते हैं। दूसरे निर्देशांकों की समय-निर्भरता नकारे बिना इसकी विशिष्टता स्थानीय आधार है।संबंधित मार्गदर्शिका: खगोलीय निर्देशांक — क्षितिज, विषुवत और क्रांतिवृत्त
ख
- खगोलीय इकाई
- सौरमंडल की दूरी का मानक, अंतरराष्ट्रीय चिह्न au। 2012 से इसकी लंबाई ठीक 149,597,870,700 मीटर है। यह पृथ्वी-सूर्य की सामान्य औसत दूरी के करीब है, लेकिन परिभाषा में स्थिर सटीक लंबाई है, हर दिन की बदलती दूरी नहीं।
- खगोलीय संधिकाल
- सूर्य का केंद्र क्षितिज से 12–18° नीचे होने की अवस्था। −18° से नीचे खगोलीय रात शुरू होती है, जिसमें सूर्य की बची संधिकालीन रोशनी लगभग समाप्त है। चंद्रमा और कृत्रिम रोशनी फिर भी आकाश चमका सकते हैं; वे इस परिभाषा को नहीं बदलते।संबंधित मार्गदर्शिका: गोधूलि — नागरिक, नौवहन और खगोलीय स्तर
ग
- गामा — ग्रहण
- सूर्यग्रहण में छाया-अक्ष की पृथ्वी-केंद्र से न्यूनतम दूरी, पृथ्वी की विषुवतीय त्रिज्या में व्यक्त। शून्य के पास पथ अधिक केंद्रीय है। लगभग ±1 के पास केंद्रीयता की सीमा आती है, लेकिन सटीक निर्णय में पृथ्वी की चपटी आकृति और पूरी ज्यामिति चाहिए। चंद्रग्रहण में गामा चंद्रमा और पृथ्वी की छाया-अक्ष का संबंधित न्यूनतम अंतर बताता है।संबंधित मार्गदर्शिका: सूर्यग्रहण — पूर्ण, वलयाकार और आंशिक कैसे बनते हैं?
- गैलीलियन उपग्रह
- बृहस्पति के चार बड़े उपग्रह आयो, यूरोपा, गैनीमीड और कैलिस्टो, जिन्हें गैलीलियो ने 1610 में देखा। लगभग 4.6–5.7 mag की चमक पर स्थिर दूरबीन में ग्रह के पास मिल सकते हैं। उनकी स्थिति रात-रात बदलती है; कभी ग्रह या उसकी छाया के कारण कोई दिखाई नहीं देता।संबंधित मार्गदर्शिका: बृहस्पति के उपग्रह — आयो, यूरोपा, गैनीमीड, कैलिस्टो
घ
- घंटा कोण
- याम्योत्तर से पिंड का पश्चिममुखी कोण, सामान्यतः समय-घंटों में। संगत संदर्भ में स्थानीय नाक्षत्र समय से विषुवांश घटाकर मिलता है। शून्य पर ऊपरी कुलमिनेशन है, जो उत्तर या दक्षिण में हो सकता है। चिह्नित या 0–24 घंटे में लपेटी परंपरा पढ़ते समय प्रदर्शन की परिभाषा देखें।संबंधित मार्गदर्शिका: नाक्षत्र समय — पृथ्वी का घूर्णन और विषुवांश
च
- चंद्र आयु
- पिछली खगोलीय अमावस्या से बीता समय, प्रायः दिनों में। औसत रूप से लगभग 7.4 दिन प्रथम चतुर्थी और 14.8 दिन पूर्णचंद्र के पास हैं, लेकिन कक्षीय चाल से वास्तविक अंतर बदलता है। यह धार्मिक तिथि या चंद्र दर्शन की आधिकारिक घोषणा की गणना नहीं।संबंधित मार्गदर्शिका: चंद्र कलाएँ — अमावस्या, अर्धचंद्र और पूर्णिमा
- चंद्र आवरण
- चंद्रमा का किसी तारे या ग्रह के सामने आकर उसे ढकना। लगभग बिंदु जैसे तारे का प्रकाश अचानक रुकता है, क्योंकि चंद्रमा का अत्यंत विरल बहिर्मंडल घने अपवर्तक वायुमंडल जैसा नहीं। बड़े चंद्र लंबन से समय और दृश्यता स्थान पर बहुत निर्भर हैं। ग्रह के चक्र को छिपने में कुछ सेकंड लग सकते हैं।संबंधित मार्गदर्शिका: चंद्र आवरण — तारा या ग्रह चंद्रमा के पीछे कब छिपता है?
- चंद्र कला
- सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी की ज्यामिति से दिखता प्रकाशित रूप। अमावस्या, प्रथम चतुर्थी, पूर्णचंद्र और अंतिम चतुर्थी मुख्य अवस्थाएँ हैं; बीच में बढ़ती या घटती पतली तथा अधिक-भरी कलाएँ मिलती हैं। पूरा चक्र एक सिनोडिक महीना है। पूर्णचंद्र का क्षण हर पारंपरिक पर्व की स्थानीय तारीख से स्वतः समान नहीं।संबंधित मार्गदर्शिका: चंद्र कलाएँ — अमावस्या, अर्धचंद्र और पूर्णिमा
- चंद्र कला-चक्र
- एक अमावस्या से अगली अमावस्या तक का पूरा दृश्य कला-चक्र। औसत लगभग 29.53 दिन, यानी सिनोडिक महीना है। पृथ्वी और चंद्रमा की बदलती कक्षीय चाल से अलग चक्र कई घंटों तक छोटे-बड़े हो सकते हैं। इसे नाक्षत्र परिक्रमा अवधि से अलग रखें।संबंधित मार्गदर्शिका: चंद्र कलाएँ — अमावस्या, अर्धचंद्र और पूर्णिमा
- चंद्र नोड
- लगभग 5.1° झुकी चंद्र कक्षा और क्रांतिवृत्त के दो प्रतिच्छेद, आरोही और अवरोही। अमावस्या या पूर्णचंद्र इनके पास हो तभी ग्रहण संभव है। नोड-रेखा करीब 18.6 वर्ष में क्रांतिवृत्त पर उलटी दिशा का चक्र बनाती है। ये भौतिक पिंड नहीं, कक्षीय ज्यामिति के बिंदु हैं।संबंधित मार्गदर्शिका: सूर्यग्रहण — पूर्ण, वलयाकार और आंशिक कैसे बनते हैं?
- चंद्र लाइब्रेशन
- चंद्रमा का दिखने वाला धीमा डोलना, जिससे समय के साथ लगभग 59 प्रतिशत सतह दिखाई दे सकती है। दीर्घवृत्ताकार कक्षीय चाल, अक्ष का झुकाव और पर्यवेक्षक का बदलता दृष्टिबिंदु प्रमुख ज्यामितीय कारण हैं; बहुत छोटा वास्तविक भौतिक दोलन भी है। एक क्षण में पूरा 59 प्रतिशत एक साथ सामने नहीं होता।संबंधित मार्गदर्शिका: चंद्र लाइब्रेशन — आधे से अधिक चंद्रतल कैसे दिखता है?
छ
- छल्ला झुकाव
- पृथ्वी से शनि के छल्ला-तल पर देखने का कोण। लगभग 29.5 वर्षीय शनि-वर्ष में परिमाण किनारी 0° से खुले लगभग 27° तक बदलता है। चिह्न उत्तरी या दक्षिणी ओर को अलग कर सकता है। किसी किनारी मौसम में पृथ्वी तल एक या तीन बार पार कर सकती है।संबंधित मार्गदर्शिका: शनि के छल्ले — झुकाव, प्रकाश और दृश्यता
ज
- जनसंख्या सूचकांक
- उल्का धारा में अगले एक परिमाण कमजोर वर्ग की संख्या का वृद्धि-अनुपात, सामान्यतः r। लगभग 2–3.5 के मान आम हैं; छोटा r अपेक्षाकृत अधिक चमकीली उल्काएँ दर्शाता है। देखी दर को मानकीकृत ZHR से जोड़ने में दृश्य सीमा और विकिरण बिंदु की ऊँचाई के साथ इसका उपयोग होता है।संबंधित मार्गदर्शिका: उल्का वर्षा — विकिरण बिंदु, ZHR और वास्तविक दर
- जूलियन दिनांक
- महीनों की अलग लंबाई से स्वतंत्र सतत दिन और दिन के अंश की गणना। प्रारंभ प्रोलैप्टिक जूलियन कैलेंडर की 1 जनवरी 4713 ईसा पूर्व दोपहर है। दशमलव भाग समय बताता है। सटीक मान में TT, UT1 या UTC जैसे समय-पैमाने का उल्लेख जरूरी है; समान क्षण के अंक पैमाने से अलग हो सकते हैं।संबंधित मार्गदर्शिका: जूलियन दिन, UT, TT और ΔT — खगोलीय समय
- ZHR — आदर्श घंटादर
- Zenithal Hourly Rate: उल्का धारा की मानकीकृत प्रति घंटा संख्या, एक पर्यवेक्षक, शिरोबिंदु पर विकिरण बिंदु और 6.5 mag दृश्य सीमा के लिए। वास्तविक ऊँचाई, चाँदनी और रोशनी से देखी दर प्रायः कम होती है। यह तुलना का मानक है, आपकी रात की निश्चित गिनती नहीं।संबंधित मार्गदर्शिका: उल्का वर्षा — विकिरण बिंदु, ZHR और वास्तविक दर
- J2000
- मानक क्षण 1 जनवरी 2000, 12:00 स्थलीय समय, अर्थात JD(TT) 2451545.0। पारंपरिक J2000 निर्देशांक उस समय के माध्य विषुवत और विषुव से संबंधित हो सकते हैं। स्थिति की काल-तिथि, जाल का विषुव-संदर्भ और ICRS जैसे तंत्र अलग अवधारणाएँ हैं। वर्तमान तुलना में अयनचलन, न्यूटेशन और आवश्यक अन्य प्रभाव शामिल होते हैं।संबंधित मार्गदर्शिका: J2000 और JNow — अयनचलन व अक्षीय दोलन
- ज्वार-भाटा
- पृथ्वी के अलग हिस्सों पर चंद्रमा और सूर्य के गुरुत्व के अंतर से महासागरों और ठोस पृथ्वी में आवर्ती विकृति। बहुत से तटों पर दिन में दो ज्वार मिलते हैं, लेकिन एक-ज्वारीय और मिश्रित प्रणालियाँ भी हैं। अमावस्या-पूर्णचंद्र के पास वृहत् और चतुर्थियों के पास लघु ज्वार का प्रभाव मिलता है; स्थानीय तटीय भूगोल वास्तविक समय और ऊँचाई बदलता है।संबंधित मार्गदर्शिका: चंद्र कलाएँ — अमावस्या, अर्धचंद्र और पूर्णिमा
ट
- Tycho-2
- लगभग 25 लाख तारों की सूची, Hipparcos उपग्रह के Tycho मापों और पुराने स्थितिगत स्रोतों के संयोजन पर आधारित। इसमें स्थितियाँ, स्वगतियाँ और दो वर्णपट्टियों की चमक हैं। लगभग 11वें परिमाण तक पूर्णता बहुत अधिक है, लेकिन सभी क्षेत्रों में एक समान कठोर सीमा नहीं। TYC पहचान तीन भाग वाली होती है।संबंधित मार्गदर्शिका: तारा सूची संख्या से खोजें — HR, HIP, HD और TYC
ड
- डांजोन पैमाना
- पूर्ण चंद्रग्रहण के रंग और चमक का पाँच-स्तरीय वर्णन। L0 अत्यंत गहरे, मुश्किल से दिखाई देने वाले चंद्रमा और L4 चमकीले ताँबे या नारंगी रंग, कभी नीले किनारे, का संकेत है। पृथ्वी के वातावरण के कण और बादल, तथा छाया में स्थिति, दृश्य को प्रभावित करते हैं।संबंधित मार्गदर्शिका: चंद्रग्रहण — छाया, लाल रंग और दृश्यता
- ΔT — डेल्टा टी
- स्थलीय समय TT और पृथ्वी-घूर्णन से जुड़े UT1 का अंतर: ΔT = TT − UT1। अनियमित घूर्णन से यह तारीख के साथ बदलता है; ऐतिहासिक और भविष्य के मानों में अनिश्चितता होती है। इसे स्थिर 69–70 सेकंड या नागरिक समय क्षेत्र का अंतर न मानें।संबंधित मार्गदर्शिका: जूलियन दिन, UT, TT और ΔT — खगोलीय समय
त
- तारक-आकृति
- आसानी से पहचाना जाने वाला तारों का पैटर्न, जो अपने आप अलग औपचारिक IAU तारामंडल नहीं है। सप्तर्षि Ursa Major का हिस्सा है; Vega, Deneb और Altair का समर ट्रायंगल कई तारामंडलों में फैला है। ऐसी परिचित आकृतियाँ पूरे आकाशीय क्षेत्र की अपेक्षा पहले खोजना आसान होता है।संबंधित मार्गदर्शिका: तारामंडल कैसे खोजें — परिचित तारों से शुरुआत
- तारामंडल
- IAU के 88 औपचारिक आकाशीय क्षेत्रों में से एक। सूची 1922 में मानक हुई; सीमाएँ 1928 में स्वीकृत और 1930 में व्यवस्थित प्रकाशित हुईं। हर दिशा किसी एक क्षेत्र की है। बोलचाल की तारों की आकृति और पूरा क्षेत्र अलग हैं; सप्तर्षि Ursa Major के भीतर का पैटर्न है।संबंधित मार्गदर्शिका: तारामंडल कैसे खोजें — परिचित तारों से शुरुआत
द
- दिगंश
- स्थानीय क्षितिज के साथ मापा दिशा-कोण। सामान्य उत्तरी-शून्य परंपरा में उत्तर 0°, पूर्व 90°, दक्षिण 180° और पश्चिम 270° है। ऊँचाई के साथ यह बताता है कि चुने स्थान और क्षण में पिंड किस दिशा में है। बाहरी स्रोत की अलग दिगंश-परंपरा हो तो उसे पहले जाँचें।संबंधित मार्गदर्शिका: सूर्य की स्थिति — दिगंश, ऊँचाई और छाया
- दीर्घांतरण
- पृथ्वी से पिंड और सूर्य की दिशाओं के बीच वास्तविक कोणीय दूरी। केवल क्रांतिवृत्तीय देशांतर घटाना सामान्यतः वही कोण नहीं देता। बुध का अधिकतम लगभग 18–28° और शुक्र का लगभग 45–47° है। सूर्य के पूर्व का हटाव शाम और पश्चिम का हटाव सुबह के अवसर से जुड़ता है।संबंधित मार्गदर्शिका: बुध और शुक्र की अधिकतम कोणीय दूरी
- दृश्य सीमा
- दिए आकाश और उपकरण में बस पहचाने जा सकने वाले सबसे हल्के तारे का परिमाण। अच्छे अँधेरे आकाश में नंगी आँख से लगभग 6–6.5 mag संभव है। संधिकाल, चाँदनी और शहर की रोशनी सीमा को छोटे परिमाण तक लाते हैं। आँख का अनुकूलन और अभ्यास भी मायने रखते हैं।संबंधित मार्गदर्शिका: तारकीय परिमाण — छोटा अंक अधिक चमकीला क्यों है?
ध
- ध्रुव तारा — Polaris
- Ursa Minor का लगभग 2 mag चमकीला तारा, उत्तरी आकाशीय ध्रुव से एक डिग्री से कम दूर। उत्तर की दिशा में लगभग स्थिर लगता है; उसकी ऊँचाई उत्तरी पर्यवेक्षक के अक्षांश के करीब है। दिल्ली और हानले से उपयोगी दिशा-संकेत है, हर दक्षिणी स्थान से नहीं। अयनचलन से हजारों वर्षों में ध्रुव दूसरी तारकीय दिशाओं में जाता है।संबंधित मार्गदर्शिका: तारामंडल कैसे खोजें — परिचित तारों से शुरुआत
- ध्रुववृत्त
- लगभग 66.6° उत्तरी और दक्षिणी अक्षांश के वृत्त, ध्रुवों से पृथ्वी के अक्षीय झुकाव जितनी दूरी पर। आदर्श सूर्य-केंद्र ज्यामिति में इनके परे कम से कम एक दिन सूर्य न डूबने और एक दिन न उगने की स्थिति हो सकती है। अपवर्तन, सौर त्रिज्या और भूभाग वास्तविक सीमाएँ बदलते हैं; अक्षीय झुकाव के साथ वृत्त भी धीरे खिसकते हैं।संबंधित मार्गदर्शिका: ध्रुवीय दिन और रात — सूर्य कब नहीं उगता या डूबता?
- ध्रुवीय रात
- उच्च अक्षांशों की वह अवधि जिसमें सूर्य दोपहर में भी क्षितिज के ऊपर नहीं आता। ध्रुव के पास लगभग आधा वर्ष हो सकती है; ध्रुववृत्त के पास अपवर्तन और सौर आकार से छोटी या अनुपस्थित। दोपहर में संधिकाल रह सकता है। ऊँचे पर्वत का छाया में होना अपने आप खगोलीय ध्रुवीय रात नहीं।संबंधित मार्गदर्शिका: ध्रुवीय दिन और रात — सूर्य कब नहीं उगता या डूबता?
न
- नाक्षत्र दिन
- वसंत बिंदु के सापेक्ष पृथ्वी के एक घूर्णन की अवधि, लगभग 23 घंटे, 56 मिनट और 4 सेकंड औसत सौर समय। यह सौर दिन से करीब 3 मिनट 56 सेकंड छोटा है। इसलिए तारे समान स्थानीय दिशा में प्रतिदिन लगभग चार मिनट पहले आते हैं; सूक्ष्म परिभाषाओं में स्थिर तारकीय दिशा और चलायमान विषुव का अंतर ध्यान में आता है।संबंधित मार्गदर्शिका: नाक्षत्र समय — पृथ्वी का घूर्णन और विषुवांश
- नाक्षत्र समय
- वसंत बिंदु का घंटा कोण। स्थानीय मान बताता है कि अभी ऊपरी याम्योत्तर पर कौन सा विषुवांश है। देशांतर और क्षण पर निर्भर है, नागरिक समय क्षेत्र पर नहीं। नाक्षत्र दिन छोटा होने से समान मान सामान्य घड़ी के अनुसार रोज करीब चार मिनट पहले लौटता है।संबंधित मार्गदर्शिका: नाक्षत्र समय — पृथ्वी का घूर्णन और विषुवांश
- नागरिक संधिकाल
- शाम में सूर्यास्त से सूर्य-केंद्र −6° तक की अवस्था; सुबह −6° से सूर्योदय तक उलटा क्रम। सामान्यतः बाहर के कार्यों के लिए कुछ प्राकृतिक रोशनी रहती है और चमकीले ग्रह-तारे दिखने लगते हैं। दृश्यता वातावरण और स्थानीय रोशनी से बदलती है।संबंधित मार्गदर्शिका: गोधूलि — नागरिक, नौवहन और खगोलीय स्तर
- निरपेक्ष परिमाण
- किसी तारे को मानक 10 पारसेक दूरी पर रखने से मिलने वाला परिमाण। समान वर्णपट्टी में यह तारों की वास्तविक प्रकाशमानता की तुलना देता है; सूर्य का दृश्य निरपेक्ष परिमाण लगभग 4.8 mag है। सौरमंडल के छोटे पिंडों के लिए दूरी और कला से जुड़ी अलग परिभाषा होती है, सामान्यतः 1 खगोलीय इकाई के संदर्भ में।संबंधित मार्गदर्शिका: तारकीय परिमाण — छोटा अंक अधिक चमकीला क्यों है?
- नीला समय
- संधिकाल का वह हिस्सा जिसमें आकाश गहरा नीला और दृश्य रोशनी नरम हो सकती है। अक्सर सूर्य की ऊँचाई लगभग −4° से −6° के बीच मार्गदर्शक सीमा होती है। आकाश और कृत्रिम प्रकाश का संतुलन फोटोग्राफी में उपयोगी है; नाम का अर्थ ठीक एक घंटा नहीं।संबंधित मार्गदर्शिका: सुनहरी और नीली बेला — फ़ोटोग्राफ़ी के प्रकाश का विज्ञान
- नौवहन संधिकाल
- सूर्य का केंद्र क्षितिज से 6–12° नीचे होने की अवस्था। नाम समुद्री दिशा-निर्धारण से आया है: कुछ परिस्थितियों में क्षितिज और पर्याप्त चमकीले तारे साथ पहचान सकते हैं। वास्तविक रोशनी, बादल और स्थानीय दृश्य सीमा से यह अनुभव बदल सकता है।संबंधित मार्गदर्शिका: गोधूलि — नागरिक, नौवहन और खगोलीय स्तर
प
- परिध्रुवीय
- ऐसा पिंड जो किसी स्थान के दैनिक आकाशीय चक्र में कभी क्षितिज के नीचे न जाए। स्थिति उस स्थान के अक्षांश और पिंड की क्रांति पर निर्भर है। दिल्ली और हानले में किसी पूरे उत्तरी तारामंडल को यूरोपीय सूची से परिध्रुवीय न मानें। ध्रुवीय क्षेत्रों में गर्मियों का सूर्य भी कुछ समय ऐसा हो सकता है।संबंधित मार्गदर्शिका: ध्रुवीय दिन और रात — सूर्य कब नहीं उगता या डूबता?
- परिमाण
- चमक का लघुगणकीय माप, mag में लिखा जाता है। छोटा अंक अधिक चमकीला पिंड; पाँच परिमाण का अंतर समान मापन-पट्टी में ठीक 100 गुना प्रकाश-प्रवाह है। एक परिमाण लगभग 2.512 गुना। प्रत्यक्ष और मानक दूरी वाले निरपेक्ष परिमाण को अलग पढ़ें।संबंधित मार्गदर्शिका: तारकीय परिमाण — छोटा अंक अधिक चमकीला क्यों है?
- पर्यवेक्षक ऊँचाई
- अवलोकन स्थल की दर्ज ऊँचाई। खुले दूरस्थ क्षितिज में इससे क्षितिज-अवनमन और उदय-अस्त बदल सकते हैं; वायुदाब अपवर्तन और स्थान चंद्रमा की स्थलकेन्द्रीय स्थिति को भी थोड़ा प्रभावित करते हैं। समुद्रतल से ऊँचाई अपने आप स्थानीय पहाड़ या भवन का क्षितिज-प्रोफ़ाइल नहीं बताती।संबंधित मार्गदर्शिका: अपवर्तन और क्षितिज-अवनमन — उदय-अस्त पर प्रभाव
- पारगमन
- खगोल में संदर्भ के अनुसार दो अर्थ। बुध या शुक्र जैसे छोटे दृश्य चक्र का सूर्य के सामने जाना सूर्य-पारगमन है। किसी पिंड का स्थानीय याम्योत्तर पार करना भी transit कहा जाता है और कुलमिनेशन से जुड़ा है। सूर्य वाला पारगमन देखने में उचित सौर सुरक्षा पूरे समय आवश्यक है।संबंधित मार्गदर्शिका: बुध और शुक्र का सूर्य-पारगमन — छोटा काला बिंदु
- पारसेक
- लगभग वह दूरी जहाँ एक खगोलीय इकाई एक कोणीय सेकंड का कोण बनाती है। खगोल में तारकीय लंबन से जुड़ी दूरी की इकाई; एक पारसेक लगभग 3.26 प्रकाश-वर्ष या 30.9 × 10^12 किलोमीटर है। नाम parallax और second से बना है। यह दूरी है, समय नहीं।
- पूर्णछाया
- सामने के पिंड से प्रकाश-स्रोत का पूरा दृश्य चक्र ढकने वाला क्षेत्र। चंद्रमा पूरा पृथ्वी की पूर्णछाया में हो तो पूर्ण चंद्रग्रहण; चंद्र पूर्णछाया पृथ्वी पर पड़े तो उस क्षेत्र में पूर्ण सूर्यग्रहण। पृथ्वी के वातावरण से मुड़ा कुछ प्रकाश चंद्रग्रहण की छाया में फिर भी पहुँच सकता है।संबंधित मार्गदर्शिका: चंद्रग्रहण — छाया, लाल रंग और दृश्यता
- पूर्णछाया परिमाण
- चंद्रग्रहण अधिकतम पर चंद्रमा की छाया में प्रवेश-गहराई का मान, चंद्र व्यास में व्यक्त। 0 और 1 के बीच आंशिक, 1 या अधिक पूर्ण ग्रहण है। केवल उपछायीय घटना में मान ऋणात्मक हो सकता है। यह ढके चंद्र क्षेत्रफल का साधारण प्रतिशत नहीं।संबंधित मार्गदर्शिका: चंद्रग्रहण — छाया, लाल रंग और दृश्यता
- पृथ्वीप्रभा
- पतली चंद्र कला के साथ रात्रि भाग की हल्की धूसर चमक। सूर्यप्रकाश पहले पृथ्वी से चंद्रमा और फिर हमारी ओर लौटता है। अमावस्या के कुछ दिन पहले सुबह या बाद शाम सबसे स्पष्ट हो सकती है। यह चंद्रतल का स्वयं प्रकाश पैदा करना नहीं है।संबंधित मार्गदर्शिका: पृथ्वीप्रभा — पतले चंद्रमा का अँधेरा भाग क्यों चमकता है?
- प्रकाश क्षय
- वायुमंडल में अवशोषण और प्रकीर्णन से पिंड का प्रकाश कम होना। अधिक वायु-पथ में प्रभाव बढ़ता है, विशेषकर क्षितिज के पास। स्पष्ट मानक आकाश में शिरोबिंदु पर लगभग 0.2–0.3 mag और क्षितिज के पास कई परिमाण का अंतर संभव है; वास्तविक मान स्थल, तरंगदैर्घ्य और हवा से बदलता है।संबंधित मार्गदर्शिका: कब पर्याप्त अँधेरा होगा — गोधूलि, चाँदनी और प्रकाश
- प्रकाश-छाया सीमा
- किसी पिंड पर दिन और रात के बीच की रेखा। चंद्रमा पर इसके पास सूर्य नीचा होता है, इसलिए क्रेटर और पर्वत लंबी छायाएँ बनाते हैं। इस तिरछे प्रकाश में दूरदर्शी से स्थलाकृति के कई विवरण पूर्णचंद्र की सामने से आती रोशनी की अपेक्षा अधिक स्पष्ट होते हैं।संबंधित मार्गदर्शिका: चंद्र कलाएँ — अमावस्या, अर्धचंद्र और पूर्णिमा
- प्रकाशमंडल
- सूर्य की कुछ सौ किलोमीटर मोटी दृश्य गैसीय परत, जिसका प्रतिनिधि प्रभावी तापमान लगभग 5,800 केल्विन है। अधिकांश दृश्य सूर्यप्रकाश यहीं से मिलता है। धब्बे, चमकीले क्षेत्र और कणिकाएँ इसकी विशेषताएँ हैं। सूर्य चक्र का किनारा केंद्र से मंद दिख सकता है, जिसे किनारी मंदता कहते हैं।संबंधित मार्गदर्शिका: सूर्यकलंक — चुंबकीय क्षेत्र, चक्र और सुरक्षित अवलोकन
- प्रकाश-यात्रा समय
- पिंड से हमारी ओर प्रकाश पहुँचने में लगा समय। चंद्रमा के लिए एक सेकंड से कुछ अधिक और सूर्य के लिए आठ मिनट से कुछ अधिक है। इसलिए किसी दूर पिंड का दृश्य उस समय की स्थिति बताता है जब उसने प्रकाश भेजा था, उसी क्षण की तात्कालिक अंतरिक्ष-स्थिति नहीं।
- प्रकाश-वर्ष
- निर्वात में प्रकाश द्वारा एक जूलियन वर्ष में तय दूरी, लगभग 9.46 × 10^12 किलोमीटर। यह दूरी है, समय नहीं। सूर्य के बाद निकटतम तारा Proxima Centauri लगभग 4.2 प्रकाश-वर्ष दूर है।
- प्रकाश विपथन
- प्रकाश की सीमित गति और पर्यवेक्षक की गति से पिंड की दिशा में दिखने वाला बदलाव। पृथ्वी की लगभग 30 किलोमीटर प्रति सेकंड की सौर कक्षीय चाल से वार्षिक विपथन करीब 20.5 कोणीय सेकंड तक होता है। सटीक प्रत्यक्ष स्थितियों में यह प्रभाव शामिल करना आवश्यक है।
- प्रतिछाया
- पूर्णछाया के शंकु के सिरे के आगे का क्षेत्र, जहाँ सामने वाला पिंड प्रकाश-स्रोत के बीच को ढकता है, पर पूरा स्रोत नहीं। चंद्र पूर्णछाया पृथ्वी तक न पहुँचे तो उसकी प्रतिछाया में वलयाकार सूर्यग्रहण दिख सकता है। सूर्य का चमकीला छल्ला बचता है, इसलिए सुरक्षा पूरे समय आवश्यक है।संबंधित मार्गदर्शिका: वलयाकार सूर्यग्रहण — चमकीला छल्ला क्यों बचता है?
ब
- बेसेल तत्व
- ग्रहण की छाया-ज्यामिति को समय के साथ व्यक्त करने वाले मान। सूर्यग्रहण में पृथ्वी के केंद्र से गुजरते आधार तल पर चंद्र छाया की स्थिति और आकार का संक्षिप्त वर्णन मिलता है। पृथ्वी-घूर्णन, ΔT और स्थानीय स्थान के साथ उनसे पथ तथा संपर्क समय निकाले जाते हैं।संबंधित मार्गदर्शिका: सूर्यग्रहण — पूर्ण, वलयाकार और आंशिक कैसे बनते हैं?
य
- याम्योत्तर
- स्थानीय उत्तर, शिरोबिंदु और दक्षिण से गुजरता आकाशीय महान वृत्त; उसका पूरा चक्र अधोबिंदु से भी गुजरता है। पिंड इसे पार करे तो कुलमिनेशन है। दिल्ली और हानले में सूर्य तथा अधिकांश ग्रहों का ऊपरी पार दक्षिण में होता है, पर बहुत उत्तरी तारे उत्तर में हो सकते हैं।
- युति
- चुनी परिभाषा में दो पिंडों का समान क्रांतिवृत्तीय देशांतर या समान विषुवांश। वास्तविक सबसे छोटी कोणीय दूरी का क्षण इससे अलग हो सकता है। सूर्य से युति में ग्रह उसकी दिशा के पास होता है। बुध और शुक्र की बहिः तथा अंतः युतियाँ सूर्य के पार और पृथ्वी की ओर वाली अवस्थाएँ अलग करती हैं।संबंधित मार्गदर्शिका: युति, वियुति और क्वाड्रेचर — ग्रहों की स्थितियाँ
र
- रंग सूचकांक
- दो मानक वर्णपट्टियों में तारे के परिमाणों का अंतर, जैसे नीले और दृश्य फ़िल्टरों का B−V। छोटा या ऋणात्मक मान अक्सर गर्म नीला और बड़ा मान ठंडा लाल तारा दर्शाता है। सूर्य का B−V लगभग 0.65 है। अंतरतारकीय धूल भी रंग बदल सकती है, इसलिए यह अकेला अचूक तापमापी नहीं।संबंधित मार्गदर्शिका: तारकीय परिमाण — छोटा अंक अधिक चमकीला क्यों है?
- राशिचक्र पट्टा
- क्रांतिवृत्त के आसपास के तारामंडलों का पट्टा जहाँ सूर्य, चंद्रमा और ग्रह दिखते हैं। आधुनिक IAU सीमाओं में सूर्य Ophiuchus सहित 13 क्षेत्रों से गुजरता है। बारह समान कोणीय ज्योतिषीय राशि-चिह्न, भारतीय नक्षत्र-विभाजन और असमान औपचारिक तारामंडल अलग प्रणालियाँ हैं; नाम समान होने से सीमाएँ समान नहीं हो जातीं।संबंधित मार्गदर्शिका: तारामंडल कैसे खोजें — परिचित तारों से शुरुआत
- रेले प्रकीर्णन
- प्रकाश की तरंगदैर्घ्य से बहुत छोटे कणों, जैसे वायु के अणुओं, पर प्रकीर्णन। इसकी शक्ति लगभग आवृत्ति की चौथी घात से बढ़ती है, इसलिए नीला प्रकाश लाल से अधिक बिखरता है। दिन का आकाश नीला और नीचे का सूर्य लालिमा वाला दिखने में इसका योगदान है।संबंधित मार्गदर्शिका: गोधूलि — नागरिक, नौवहन और खगोलीय स्तर
ल
- लंबन
- अलग अवलोकन-बिंदुओं से किसी पिंड की दिशा में दिखने वाला बदलाव। पृथ्वी की सौर कक्षा से मिलने वाला वार्षिक तारकीय लंबन दूरी का आधार है। निकट चंद्रमा के लिए पृथ्वी के केंद्र और सतह की दिशाओं में लगभग एक डिग्री तक अंतर हो सकता है; दो स्थानों के बीच वास्तविक अंतर उनकी ज्यामिति पर निर्भर है।
- लीप सेकंड
- पुरानी UTC व्यवस्था में UT1 से अंतर 0.9 सेकंड के भीतर रखने के लिए जरूरत पर जोड़ा जाने वाला सेकंड। 1972 से लागू इस व्यवस्था में अंतिम जोड़ 2016 के अंत में हुआ। CGPM के 2026 संकल्प 5 के अनुसार 20 मई 2027 से निरंतर UTC और अधिकतम UT1−UTC अंतर 3600 सेकंड वाला ढाँचा है। इससे उस दिन अचानक एक घंटे का घड़ी-परिवर्तन नहीं होता।संबंधित मार्गदर्शिका: जूलियन दिन, UT, TT और ΔT — खगोलीय समय
व
- वक्री गति
- ग्रह का तारकीय पृष्ठभूमि पर सामान्य पूर्वमुखी चाल के विपरीत पश्चिम की ओर दिखना। पृथ्वी बाहरी ग्रह को पार करे या भीतर का बुध-शुक्र पृथ्वी को पार करे तो बदलता दृष्टिकोण यह प्रभाव बनाता है। सूर्य की वास्तविक परिक्रमा की दिशा नहीं पलटती और इससे व्यक्तिगत घटनाओं का ज्योतिषीय पूर्वानुमान नहीं निकलता।संबंधित मार्गदर्शिका: ग्रहों की वक्री गति — पीछे चलते क्यों दिखाई देते हैं?
- वर्णक्रम वर्ग
- तारे के वर्णक्रम की विशेषताओं से वर्गीकरण, मुख्यतः सतही तापमान से संबंधित। O, B, A, F, G, K और M गर्म नीले से ठंडे लाल तारों की सामान्य मुख्य श्रेणियाँ हैं। सूर्य G2 है। विस्तृत वर्णन में प्रकाशमानता वर्ग और दूसरे संकेत जुड़ सकते हैं।
- वसंत बिंदु
- विषुवत और क्रांतिवृत्त का वह प्रतिच्छेद जहाँ सूर्य मार्च विषुव पर दक्षिण से उत्तर जाता है। पारंपरिक विषुवांश और क्रांतिवृत्तीय देशांतर का शून्य है। अयनचलन से तारों के सापेक्ष धीरे पश्चिम की ओर खिसकता है; यह किसी स्थिर तारकीय समूह का स्थायी बिंदु नहीं।संबंधित मार्गदर्शिका: विषुवांश और क्रांति — आकाश के देशांतर व अक्षांश
- वास्तविक स्थानीय सौर समय
- आपके स्थान पर वास्तविक सूर्य की दिशा पर आधारित समय। इसकी दोपहर 12 बजे सूर्य का ऊपरी कुलमिनेशन है। मानक नागरिक समय से अंतर में देशांतर और समय समीकरण दोनों योगदान देते हैं। पूरे IST क्षेत्र के लिए सूर्य की दोपहर ठीक 12:00 नहीं; मानक क्षेत्र UTC+05:30 ही रहता है।संबंधित मार्गदर्शिका: समय समीकरण — सौर दोपहर हमेशा 12 बजे क्यों नहीं?
- विकिरण बिंदु
- आकाश में वह दिशा जहाँ से उल्का धारा की रेखाएँ निकलती लगती हैं। कणों के लगभग समानांतर मार्ग परिप्रेक्ष्य से एक बिंदु पर मिलते दिखते हैं। अधिक ऊँचा विकिरण बिंदु सामान्यतः अधिक उल्काएँ आपके दृश्य आकाश तक लाता है। उल्काएँ केवल उसी बिंदु पर नहीं, दूर भी दिखती हैं।संबंधित मार्गदर्शिका: उल्का वर्षा — विकिरण बिंदु, ZHR और वास्तविक दर
- वियुति
- बाहरी ग्रह और सूर्य के क्रांतिवृत्तीय देशांतर में 180° का अंतर। ग्रह सूर्य की विपरीत दिशा के पास, लगभग सूर्यास्त पर उदय और सच्चे स्थानीय सौर मध्यरात्रि के पास कुलमिनेशन में होता है। निकटता और बड़ा चक्र इसे अच्छा अवसर बनाते हैं; सटीक न्यूनतम दूरी का क्षण थोड़ा अलग हो सकता है।संबंधित मार्गदर्शिका: युति, वियुति और क्वाड्रेचर — ग्रहों की स्थितियाँ
- विश्व समय — UT
- पृथ्वी के घूर्णन पर आधारित समय-परिवार। प्रमुख UT1 वास्तविक घूर्णन कोण बताता है और पूरी तरह समान चाल से नहीं चलता। परमाणु-आधारित नागरिक UTC अलग है। पुराने लीप-सेकंड नियम का 0.9 सेकंड अंतर स्थायी भविष्य-नियम नहीं; 2026 के CGPM निर्णय में 20 मई 2027 से निरंतर UTC का नया ढाँचा है।संबंधित मार्गदर्शिका: जूलियन दिन, UT, TT और ΔT — खगोलीय समय
- विषुव
- सूर्य के आकाशीय विषुवत पार करने का क्षण, मार्च में लगभग 20 और सितंबर में लगभग 22–23 तारीख के आसपास। दिन और रात की अवधि करीब होती है, लेकिन सौर त्रिज्या और अपवर्तन से सूर्योदय-अस्त वाला दिन कुछ लंबा रहता है। स्थानीय ठीक 12 घंटे वाला दिन और पारंपरिक पर्व अलग निर्धारण हैं।संबंधित मार्गदर्शिका: अयनांत और विषुव — सूर्य से तय ऋतु-बिंदु
- विषुवतीय प्रणाली
- आकाशीय विषुवत को आधार बनाने वाली निर्देशांक प्रणाली। विषुवांश उसके साथ और क्रांति उसके उत्तर-दक्षिण गिनी जाती है। तारों के मान चुने संदर्भ में स्थानीय दैनिक आकाश-घूर्णन से नहीं बदलते, लेकिन स्वगति और संदर्भ तिथि महत्वपूर्ण हैं। ग्रहों के निर्देशांक उनकी चाल से बदलते रहते हैं।संबंधित मार्गदर्शिका: खगोलीय निर्देशांक — क्षितिज, विषुवत और क्रांतिवृत्त
- विषुव-संदर्भ
- विषुव वह खगोलीय क्षण है जब सूर्य का प्रत्यक्ष क्रांतिवृत्तीय देशांतर मार्च में 0° या सितंबर में 180° होता है। निर्देशांक में ‘J2000 विषुव’ जैसा प्रयोग विषुवत और वसंत बिंदु की संदर्भ-दिशा बताता है। यह पिंड की स्थिति की काल-तिथि या पूरे संदर्भ तंत्र के समान अवधारणा नहीं।संबंधित मार्गदर्शिका: अयनांत और विषुव — सूर्य से तय ऋतु-बिंदु
- विषुवांश
- आकाशीय विषुवत के साथ वसंत बिंदु से पूर्व की ओर गिना कोण, α या RA। प्रायः 0–24 घंटे, समय-मिनट और समय-सेकंड में लिखा जाता है; 1 घंटा 15° है। स्थानीय नाक्षत्र समय से तुलना घंटा कोण देती है। सूची में विषुव-संदर्भ, काल-तिथि और संदर्भ तंत्र भी महत्वपूर्ण हैं।संबंधित मार्गदर्शिका: विषुवांश और क्रांति — आकाश के देशांतर व अक्षांश
श
- शिरोबिंदु
- पर्यवेक्षक के ठीक ऊपर की दिशा, क्षितिज से 90°। कोई पिंड तभी वहाँ से गुजर सकता है जब उसकी क्रांति स्थान की अक्षांश के बराबर हो। सूर्य का शिरोबिंदु-पार केवल कर्क और मकर रेखाओं के बीच संभव है। दिल्ली और हानले में वह ठीक सिर के ऊपर नहीं आता।संबंधित मार्गदर्शिका: सूर्य की स्थिति — दिगंश, ऊँचाई और छाया
स
- संकर सूर्यग्रहण
- दुर्लभ केंद्रीय सूर्यग्रहण, जिसका पथ कुछ हिस्सों में पूर्ण और कुछ में वलयाकार होता है। पृथ्वी की वक्रता और स्थानीय दूरी से कहीं पूर्णछाया सतह तक पहुँचती है, कहीं प्रतिछाया। 20 अप्रैल 2023 इसका उदाहरण था। पूरे विश्व का प्रकार और आपके स्थान का चरण अलग पढ़ें।संबंधित मार्गदर्शिका: वलयाकार सूर्यग्रहण — चमकीला छल्ला क्यों बचता है?
- संधिकाल
- सूर्योदय से पहले और सूर्यास्त के बाद वायुमंडल में प्रकीर्णित सूर्यप्रकाश का संक्रमण समय। सुबह उषाकाल और शाम गोधूलि है। केंद्र की गहराई से नागरिक, नौवहन और खगोलीय अवस्थाएँ क्रमशः −6°, −12° और −18° की सीमाओं से अलग की जाती हैं।संबंधित मार्गदर्शिका: गोधूलि — नागरिक, नौवहन और खगोलीय स्तर
- संपर्क समय
- ग्रहण या पारगमन में दो दृश्य चक्रों की सीमाएँ छूने के क्षण। सूर्यग्रहण के C1–C4 स्थानीय क्रम बताते हैं; केंद्रीय पथ से बाहर C2 और C3 नहीं होते। चंद्रग्रहण में P1, U1–U4 और P4 उपछाया तथा पूर्णछाया के चरण हैं। समय-पैमाना और स्थानीय दृश्यता साथ देखें।संबंधित मार्गदर्शिका: ग्रहण के संपर्क समय C1–C4 — हर चरण का अर्थ
- समकालिक घूर्णन
- जब कोई पिंड अपनी धुरी पर उसी अवधि में घूमे जिसमें केंद्रीय पिंड की परिक्रमा करता है। चंद्रमा का ज्वारीय विकास उसे पृथ्वी की ओर लगभग वही गोलार्ध रखने वाली स्थिति में लाया। लाइब्रेशन के कारण समय के साथ फिर भी लगभग 59 प्रतिशत चंद्रतल दिखाई दे सकता है।संबंधित मार्गदर्शिका: चंद्र लाइब्रेशन — आधे से अधिक चंद्रतल कैसे दिखता है?
- समदिन-समरात्रि दिन
- वह स्थानीय तारीख जब परिभाषित सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच दिन लगभग 12 घंटे का होता है। अपवर्तन और सूर्य की त्रिज्या दिन बढ़ाते हैं, इसलिए यह खगोलीय विषुव की तारीख से अलग हो सकती है। उत्तर में अक्सर मार्च विषुव से पहले और सितंबर विषुव के बाद; सटीक तारीख अक्षांश और परिभाषा पर निर्भर है।संबंधित मार्गदर्शिका: अयनांत और विषुव — सूर्य से तय ऋतु-बिंदु
- समय समीकरण
- प्रचलित संकेत में वास्तविक सौर समय और माध्य सौर समय का अंतर। पृथ्वी की दीर्घवृत्ताकार कक्षा और अक्षीय झुकाव से साल में लगभग −14 से +16 मिनट के बीच बदलता है। कुछ बाहरी स्रोत उलटा चिह्न लेते हैं। नागरिक समय से पूरा अंतर निकालते हुए देशांतर और समय क्षेत्र भी चाहिए।संबंधित मार्गदर्शिका: समय समीकरण — सौर दोपहर हमेशा 12 बजे क्यों नहीं?
- सारोस
- 223 सिनोडिक महीनों का ग्रहण-संबंधी चक्र, लगभग 18 वर्ष, 11 दिन और 8 घंटे। सूर्य, चंद्रमा और नोड की लगभग लौटती ज्यामिति से मिलती-जुलती घटना बनती है। अतिरिक्त आठ घंटे में पृथ्वी घूमती है, इसलिए अगला पथ करीब 120° पश्चिम की ओर मिलता है; वही शहर या ठीक समान ग्रहण सुनिश्चित नहीं।संबंधित मार्गदर्शिका: सूर्यग्रहण — पूर्ण, वलयाकार और आंशिक कैसे बनते हैं?
- सिज़िजी
- सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा या अन्य तीन पिंडों का लगभग एक सीध में होना। अमावस्या और पूर्णचंद्र उदाहरण हैं। चंद्रमा नोड के पास भी हो तो ग्रहण संभव है। ऐसे समय सूर्य-चंद्र ज्वार प्रभाव मिलकर वृहत् ज्वार देते हैं, लेकिन स्थानीय जलस्तर तटीय भूगोल और मौसम से भी बदलता है।संबंधित मार्गदर्शिका: चंद्र कलाएँ — अमावस्या, अर्धचंद्र और पूर्णिमा
- सिनोडिक महीना
- एक अमावस्या से अगली तक औसतन लगभग 29.53 दिन। यह करीब 27.32 दिन की नाक्षत्र चंद्र परिक्रमा से लंबा है, क्योंकि पृथ्वी सूर्य की कक्षा में आगे बढ़ती है और चंद्रमा को फिर सूर्य की दिशा पकड़नी होती है। अलग महीनों की वास्तविक अवधि कुछ बदलती है।संबंधित मार्गदर्शिका: चंद्र कलाएँ — अमावस्या, अर्धचंद्र और पूर्णिमा
- सुनहरा समय
- सूर्योदय के आसपास और सूर्यास्त के आसपास कम ऊँचे सूर्य की नरम, गर्म रोशनी तथा लंबी छायाओं वाला समय। फोटोग्राफी में लगभग +6° से −4° सौर ऊँचाई जैसी सीमा उपयोग होती है। यह सार्वभौमिक प्राकृतिक सीमा या ठीक साठ मिनट की अवधि नहीं; अक्षांश, ऋतु और वातावरण असर डालते हैं।संबंधित मार्गदर्शिका: सुनहरी और नीली बेला — फ़ोटोग्राफ़ी के प्रकाश का विज्ञान
- सुपरमून
- उपभू के पास का पूर्णचंद्र, जिसके लिए कोई एक सर्वमान्य दूरी-सीमा नहीं। निकटतम और दूरस्थ चरम पूर्णचंद्रों की तुलना में व्यास करीब 14 प्रतिशत और कुल प्रकाश लगभग 30 प्रतिशत अधिक हो सकता है। औसत पूर्णचंद्र से अंतर छोटा है। बिना समान पैमाने की सीधी तुलना आकार का बदलाव पहचानना कठिन है।संबंधित मार्गदर्शिका: सुपरमून और मिनीमून — दूरी से कितना अंतर आता है?
- सूची पहचान संख्या
- खगोलीय सूची में पिंड का पहचान-चिह्न। Polaris की HIP 11767 और HD 8890 जैसी अलग सूची पहचानें हैं। Tycho-2 में तीन भाग वाली TYC संख्या होती है। एक पिंड कई सूचियों में हो सकता है, इसलिए अलग संख्याएँ अलग तारा होने का प्रमाण नहीं; उपसर्ग सही रखना जरूरी है।संबंधित मार्गदर्शिका: तारा सूची संख्या से खोजें — HR, HIP, HD और TYC
- सूर्यधब्बा संख्या
- सूर्य की धब्बा गतिविधि का मानक, Rudolf Wolf से जुड़ी सापेक्ष संख्या। समूहों की संख्या के दस गुने और अलग धब्बों की संख्या को उपकरण तथा पर्यवेक्षक के सुधार-कारक से जोड़ा जाता है। लंबी ऐतिहासिक श्रृंखला 18वीं सदी तक जाती है। यह एक समूह का वर्गीकरण या आज का बिना माप वाला अनुमान नहीं।संबंधित मार्गदर्शिका: सूर्यकलंक — चुंबकीय क्षेत्र, चक्र और सुरक्षित अवलोकन
- सूर्योदय
- सूर्य के ऊपरी दृश्य किनारे का परिभाषित क्षितिज पर उभरना; सूर्यास्त उसी किनारे का अंतिम गायब होना है। सामान्य खुले क्षितिज की परंपरा में केंद्र लगभग 50 कोणीय मिनट नीचे होता है: करीब 16′ सौर त्रिज्या और 34′ मानक अपवर्तन। ऊँचाई, भूभाग और वास्तविक हवा देखे समय को बदल सकते हैं।संबंधित मार्गदर्शिका: सूर्योदय और सूर्यास्त — समय क्यों बदलता है?
- सौर चक्र
- लगभग ग्यारह वर्ष में सूर्यधब्बों और संबंधित चुंबकीय गतिविधि का बढ़ना-घटना। चुंबकीय ध्रुवीयता हर चक्र में बदलती है, इसलिए पूरा चुंबकीय चक्र लगभग 22 वर्ष है। चक्र 25 का आरंभ 2019 के अंत से माना जाता है। किसी वर्तमान अवस्था के लिए दिनांकित माप चाहिए; केवल क्रम से ‘अभी घट रहा है’ नहीं कहा जा सकता।संबंधित मार्गदर्शिका: सूर्यकलंक — चुंबकीय क्षेत्र, चक्र और सुरक्षित अवलोकन
- सौर-भौगोलिक निर्देशांक
- सूर्य पर देशांतर और अक्षांश का मानक जाल, जो पृथ्वी के भूगोल से मिलता-जुलता है। देशांतर अक्सर Carrington प्रणाली में दिया जाता है; उसकी नाक्षत्र घूर्णन अवधि लगभग 25.38 दिन है, पृथ्वी से दिखने वाली अवधि अलग है। इससे सूर्यधब्बों की कई दिनों की गति की तुलना की जाती है।संबंधित मार्गदर्शिका: सूर्यकलंक — चुंबकीय क्षेत्र, चक्र और सुरक्षित अवलोकन
- स्थलकेन्द्रीय
- पृथ्वी के केंद्र के बजाय सतह पर पर्यवेक्षक के वास्तविक स्थान से संबंधित स्थिति। निकट चंद्रमा के लिए दोनों दिशाओं में उल्लेखनीय लंबन-अंतर होता है, क्योंकि पृथ्वी की त्रिज्या उसकी दूरी के सामने नगण्य नहीं। इसलिए समान क्षण के स्थलकेन्द्रीय निर्देशांक अलग शहरों से अलग हो सकते हैं।
- स्थलीय समय — TT
- नियमित गति वाला खगोलीय समय-पैमाना, जो पृथ्वी-आधारित इफेमेरिस में उपयोगी है। मानक संबंध TT = TAI + 32.184 सेकंड है। पृथ्वी के घूर्णन से जुड़े UT1 से इसका अंतर ΔT है। नागरिक UTC, स्थानीय IST और TT को बिना रूपांतरण समान घड़ी न मानें।संबंधित मार्गदर्शिका: जूलियन दिन, UT, TT और ΔT — खगोलीय समय
- स्थिति कोण
- एक पिंड के सापेक्ष दूसरी दिशा का कोण, आकाशीय उत्तर से पूर्व की ओर गिना जाता है। इससे चंद्र किनारे पर तारे का आवरण, सूर्यग्रहण का पहला संपर्क या दोहरे तारे की दिशा व्यक्त की जाती है। चित्र में उत्तर ऊपर और पूर्व बाएँ हो तो गिनती वामावर्त दिखती है; उपकरण का उलटाव स्क्रीन की दिशा बदल सकता है।संबंधित मार्गदर्शिका: ग्रहण के संपर्क समय C1–C4 — हर चरण का अर्थ
- स्पर्शी आवरण
- चंद्र आवरण का सीमावर्ती मार्ग, जिसमें तारा चंद्र किनारे को बस छूता है। पर्वत और घाटियाँ उसे कई बार छिपा और प्रकट कर सकती हैं। संकीर्ण पट्टी में अलग पर्यवेक्षकों के सटीक समय चंद्र किनारे के प्रोफ़ाइल को मापने में मदद करते हैं। स्थान में थोड़ा बदलाव भी दृश्य क्रम बदल सकता है।संबंधित मार्गदर्शिका: चंद्र आवरण — तारा या ग्रह चंद्रमा के पीछे कब छिपता है?
- स्वगति
- अंतरिक्ष में तारे की वास्तविक चाल से तारकीय पृष्ठभूमि पर धीरे बदलती दिशा। इसे सामान्यतः प्रति वर्ष कोणीय सेकंड या मिली-कोणीय सेकंड में लिखते हैं। अधिकतर तारों का वार्षिक बदलाव छोटा है; Barnard’s Star लगभग 10 कोणीय सेकंड से अधिक प्रति वर्ष वाला प्रसिद्ध तेज उदाहरण है।संबंधित मार्गदर्शिका: तारा सूची संख्या से खोजें — HR, HIP, HD और TYC
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